
मरुधर हिंद न्यूज (रमेशचंद) नीमराना – उपखंड क्षेत्र के कुतीना गांव में शनिवार को अमर शहीद कंवरपाल सिंह चौहान का 17वां शहादत दिवस मनाया गया। शहीद के बलिदान को नमन करते हुए आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुंडावर विधायक ललित यादव ने कहा कि वीर जवानों की सेना के कारण आज हम सुरक्षित हैं। सेना के जवान हमारे सच्चे प्रहरी हैं और हमारे लिए अपनी छाती पर गोली खाकर हमारी सेवा करते हैं।

शहीद कंवरपाल सिंह चौहान के बड़े भाई पूर्व सैन्य अधिकारी कौशल सिंह चौहान ने बताया कि शहीद ने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि विकास सिंह महासचिव अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा दिल्ली, डॉक्टर जलदीप सिंह पथिक पूर्व उप निदेशक आयुष विभाग राजस्थान, भाजपाअलवर उत्तर पूर्व जिला अध्यक्ष उम्मेद सिंह भाया, योगेश सिंह चौहान सरपंच, जिंदा शहीद स्मारक मुकेश चौहान, जिला पार्षद वेद प्रकाश खबरी, जयप्रकाश झाबर एवं संदीप यादव फौलादपुरिया, जसाई पंडित वीरेंद्र शर्मा, सरपंच संघ प्रदेश उपाध्यक्ष उमाशंकर यादव, समाजसेवी शंकर सिंह चौहान बटाना, सूबेदार मेजर रणधीर सिंह यादव, गोपाल सिंह राजावत रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा राम कुमार नाथ जति आश्रम कुतीना के द्वारा की गई। मंच संचालन सरपंच रविंद्र सिंह चौहान ने किया। अतिथियों ने शहीद कंवरपाल सिंह चौहान के स्मारक पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

विधायक ललित यादव ने कहा कि शहीद कंवरपाल सिंह चौहान की माता कमला देवी एवं पिता हीरा सिंह चौहान को सच्चे शब्दों से शुक्रगुजार करता हूं जिन्होंने ऐसे अमर शहीद को जन्म दिया। उनकी वीरांगना राधा देवी को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं जिन्होंने देश की सेवा में अपने पति को भेजकर देश की सेवा में बलिदान न्योछावर कर दिया।

इस अवसर पर शहीद के पुत्र मनमोहन सिंह, पुत्री कंचन कंवर व नेहा कंवर, नरेंद्र चौहान सृष्टि इंटीरियर फर्नीचर नीमराना, नरेश चौहान निदेशक जेएनवी स्कूल, सीताराम यादव, जयवीर चौहान, सुनील यादव सासेड़ी, कैप्टन देवेंद्र चौहान, महावीर पंच, राकेश चौहान, दीनदयाल उप सरपंच सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

शहीद कंवरपाल सिंह चौहान जीवन परिचय
शहीद कंवरपाल सिंह चौहान का जन्म 1 जुलाई 1980 को अलवर जिले के कुतीना गांव में माता कमला देवी एवं पिता हीरा सिंह चौहान के घर हुआ। उन्होंने दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 18 जुलाई 2000 को सेना में ट्रेनिंग प्राप्त कर 14 ग्रेनेडियर में कार्यरत हुए।






