एनआईआईटी यूनिवर्सिटी नीमराना में राठ महोत्सव का भव्य आयोजन, संस्कृति-परंपरा और सामाजिक एकता का दिखा संगम

मरुधर हिंद न्यूज  (रमेशचंद) नीमराना – एनआईआईटी यूनिवर्सिटी नीमराना परिसर में शनिवार को सांस्कृतिक गौरव को समर्पित राठ महोत्सव का भव्य आयोजन उत्साह और उमंग के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शहीदों को श्रद्धांजलि अर्प, दीप प्रज्वलन व पुष्प अर्पण के साथ किया गया। महोत्सव में समाज की समृद्ध परंपराओं, लोकसंस्कृति और आपसी एकता का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला। पारंपरिक लोकनृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और समाज से जुड़े प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

वक्ताओं ने राठ समाज के इतिहास, सामाजिक योगदान और युवा पीढ़ी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा, संस्कार और संगठन की मजबूती पर जोर दिया। कार्यक्रम में एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारी, समाज के गणमान्य लोग, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु मौजूद रहे। आयोजन ने सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आपसी सौहार्द का सशक्त संदेश दिया।

महोत्सव के दौरान एडवोकेट राकेश यादव प्रदेश उपाध्यक्ष विधि, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी, नीमराना पूर्व सरपंच अशोक मुद्गल, युवा समाजसेवी रविंद्र यादव (नगर पालिका नीमराना), नगर कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट वेदप्रकाश सैनी, उपाध्यक्ष संजय यादव, पर्यावरणविद् भूपेंद्र सिंह चौहान, कांग्रेस नेता विजेंद्र महलावत,

युवा समाजसेवी कर्मपाल चौहान, राजस्थान पंचायती राज पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मूलचंद गुर्जर, कांग्रेस नेता अशोक दौराता, भाजपा पूर्व जिला अध्यक्ष उम्मेद सिंह भाया, शिव स्वरूप गौशाला अध्यक्ष मास्टर वीरेंद्र यादव, पूर्व अध्यक्ष दिलीप मुनीम, एटीसी ट्रांसपोर्टर राकेश चौधरी, राष्ट्रीय बहुजन सामाजिक परिसंघ राजस्थान प्रदेश महासचिव महावीर प्रसाद चर्खिया, गिरीश राठौर, सुनील सेन, जयवीर सिंह चौहान, अभिराज सिंह, लक्ष्यराज सिंह चौहान, भूपेंद्र सिंह गुर्जर, गजेंद्र गुर्जर, अनिल गुर्जर, केदारनाथ आश्रम के महंत भोलूनाथ, जनक सिंह यादव (पूर्व पार्षद), संदीप यादव, राजेश यादव तलवाड़िया सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अंत में आयोजन समिति के सीताराम, भूपेंद्र सिंह चौहान, दुलीचंद मोरोडिया सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया गया।