बडोदिया में पहली बार महामुनि का चातुर्मास, नगर ने किया स्वागत

*बडोदिया में पहली बार महामुनि का चातुर्मास, नगर ने किया स्वागत*

अरुण जोशी ब्यूरो चीफ बांसवाड़ा

बडोदिया:  जैन समाज बडोदिया के इतिहास में पहली बार दिगंबर महामुनिराज के चातुर्मास के लिए नगर में प्रवेश हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने पलक-पांवड़े बिछाकर स्वागत किया। अहिंसा सर्कल स्थित विद्यासुंदर कॉम्प्लेक्स में विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री शुद्ध सागरजी महाराज और क्षुल्लक श्री अकम्प सागरजी महाराज को नगर प्रवेश के लिए समाज के जीतमल तलाटी, सरेश चंद्र जैन, कमलेश दोसी, निलेश तलाटी सहित चारों सेठ और पंचों ने श्रीफल भेंट किया।
नगर में प्रवेश के समय सबसे पहले पंचों ने मुनि संघ का पाद प्रक्षालन किया। इसके बाद शोभायात्रा निकली। सबसे आगे नन्हे बालक धर्म ध्वजाएं लिए चल रहे थे। महिलाएं मंगल कलश लेकर साथ थीं। सफेद वस्त्रों में युवा ‘विद्यासागर नाम रे… जपो सुबह शाम रे…’ भक्ति गीत गाते चल रहे थे। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए। पाद प्रक्षालन कर मुनि संघ की वंदना की।शोभायात्रा श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर पहुंची। यहां महिला मंडल ने तीन परिक्रमा कीं। इसके बाद जिन शासन की धर्म प्रभावना हेतु मुनि संघ से निवेदन किया गया। प्रारंभ में मंगलाचरण पलक जैन ने किया। मुनि संघ को जीवनवाणी भेंट करने का सौभाग्य रमेश चंद्र खोडणिया अनिता देवी मयुरी खोडणिया श्रेयांस खोडणिया सोनाली खोडणिया सिद्धार्थ खोडणिया जयंतिलाल खोडणिया उमेश खोडणिया संजय खोडणिया और वृति सुधा देवी,शैलेन्‍द्र खोडणिया,दिपेश खोडणिया, यश खोडणिया कस्‍तुर चंद वजेचंद खोडणिया परिवार को मिला। संचालन जयंतिलाल खोडणिया ने किया। इस अवसर पर मुनि श्री शुद्ध सागरजी महाराज ने कहा कि दो प्रकार की प्रभावना होती है। एक वह जो झंडा, माइक लेकर की जाती है। दूसरी वह जो लोगों के दिल में छप जाती है। दिल में छपने वाली प्रभावना ही श्रेष्ठ होती है। जब नगर में चातुर्मास हो और पूरा नगर साधु-संतों की सेवा करे, तो वह प्रभावना युगों-युगों तक याद रहती है। दुनिया देखती है कि श्रावक साधु की सेवा कैसे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवली भगवान के ज्ञान में जब झलकेगा, तब मुनि महाराज अपने आप नगर में आ जाएंगे। इसलिए आकुल-व्याकुल न हों। हमारी तैयारी से कुछ नहीं होता, काम जब होना होता है, तब होता है। क्षुल्लक श्री अकम्प सागरजी महाराज ने कहा कि अब समय है कि 60 वर्ष से ऊपर के लोग दिन में तीन बार जिन मंदिर आकर संतों के सान्निध्य में धर्मकर्म करें। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर बार-बार नहीं मिलते। नगर में गुरु आए हैं, तो श्रावक अपने मूल कर्तव्य को समझें और समय का सदुपयोग कर जीवन का कल्याण करें।