
खैरथल – तिजारा जिले में कांग्रेस में खुली फूट, एक ही मुद्दे पर दो जगह जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस
जिला अध्यक्ष और विधायक आमने-सामने, ‘मनरेगा बचाओ’ बना आपसी शक्ति प्रदर्शन
जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस पर असमंजस,जिला अध्यक्ष की चलेगी या विधायक की, निर्णय कौन लेगा..?
मोहम्मद शकील/विजय सिंह
खैरथल 10 जनवरी। कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक हो गई। आज शनिवार को केंद्र सरकार के खिलाफ मनरेगा को लेकर विरोध के नाम पर कांग्रेस में दो फाड़ साफ नजर आए। एक तरफ जिला कांग्रेस अध्यक्ष की अगुवाई में जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, तो दूसरी ओर जिला स्तरीय विधायक कार्यालय पर अलग प्रेस वार्ता कर पार्टी की गुटबाजी को उजागर कर दिया। विधायक कार्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता विधायक दीपचन्द खैरिया ने की, जिसमें मुंडावर विधायक ललित यादव भी मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार ओर जिला कांग्रेस कमेटी खैरथल-तिजारा द्वारा अलग से जिला स्तरीय प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें जिला अध्यक्ष बलराम यादव सहित नोहर विधायक अमित चाचाण कांग्रेस पदाधिकारी शामिल हुए। कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर मनरेगा का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ करने का आरोप लगाते हुए देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाया जा रहा है। जिला स्तरीय कांग्रेस प्रेस वार्ता में भाजपा पर महापुरुषों के अपमान का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस सरकार ने मनरेगा योजना लागू की थी, लेकिन अब भाजपा महात्मा गांधी का नाम हटाकर मजदूरों के अधिकारों में कटौती कर रही है। हालांकि एक ही दिन, एक ही मुद्दे पर दो अलग-अलग जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस संगठन में समन्वय की भारी कमी है और गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। जनता के मुद्दों से ज्यादा कांग्रेस के नेता आपसी मतभेद की लड़ाई में उलझे नजर आ रहे हैं।
*एक सवाल अब आम लोगों की जुबान पर है*
एक सवाल अब आम लोगों की जुबान पर है कि जो कांग्रेस पार्टी एक ही मुद्दे पर अपने नेताओं को एक मंच पर खड़ा नहीं कर पा रही, वह जनता के अधिकारों की लड़ाई आखिर किस भरोसे लड़ेगी। मनरेगा बचाने के नाम पर दो अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस ने यह साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर मुद्दों से ज्यादा मतभेद की जंग चल रही है। जनता के हक की बात करने वाली कांग्रेस पहले खुद की सियासत सहेजने में नाकाम नजर आ रही है।
*कांग्रेस की जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस बनी चर्चा का विषय*
एक ही दिन, एक ही मुद्दे पर जिले में दो अलग-अलग जगह आयोजित जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस की गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया है। जिसे संगठन की ताकत का प्रदर्शन होना चाहिए था, वही कार्यक्रम आपसी खींचतान का तमाशा बन गया। अलग-अलग मंचों से अलग-अलग नेता बोलते नजर आए, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया कि कांग्रेस में आखिर नेतृत्व किसके हाथ में है। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक अब यही चर्चा है कि जब कांग्रेस खुद एकजुट नहीं दिखती, तो जनता के मुद्दों पर वह कितनी गंभीर हो सकती है।
*जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस पर असमंजस, जिला अध्यक्ष की चलेगी या विधायक की, निर्णय कौन लेगा..?*
खैरथल – तिजारा जिले में यह सवाल अब तीखे तौर पर उठने लगा है कि आखिर जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस किसकी मानी जाए—जिला कांग्रेस अध्यक्ष की या फिर विधायक की। एक ही मुद्दे पर दो अलग-अलग मंच और दो अलग-अलग दावे सामने आने से कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जो कार्यक्रम एकजुट संदेश देने के लिए था, वही नेतृत्व की आपसी खींचतान का प्रतीक बन गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस में जिला स्तर पर आखिर फैसला कौन करता है और पार्टी की असली कमान किसके हाथ में है..?
*कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान, चुनाव में पड़ेगा भारी खामियाजा*
खैरथल–तिजारा जिले में कांग्रेस में चल रही आपसी खींचतान अब आगामी चुनावों के लिए खतरे की घंटी बन गई है। जिला अध्यक्ष और विधायक के बीच बढ़ते मतभेद और गुटबाजी ने संगठन को कमजोर कर दिया है, जिससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब पार्टी के शीर्ष नेता ही एकजुट नहीं दिखते, तो जनता के सामने मजबूत और सुसंगठित चेहरे पेश करना मुश्किल हो जाता है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो कांग्रेस को आगामी चुनाव में भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।





