स्लग =अनोखा लहंगा 51 मीटर घेर का लेहंगा बना आकर्षण का केंद्र

लोकेशन = जोधपुर

पूरे भारत में पहला और इकलौता एक ऐसा लेहंगा जिसका घेर 51 मीटर का हो – घूमते ही लहरें उठें, जैसे राजपूताना की शाही महफिल!

एंकर जोधपुर मे इन दिनों एक घेरदार घाघरा चर्चा का विषय बना हुआ है एक ऐसा लेहंगा जिसका घेरा 51 मीटर का हो – घूमते ही लहरें उठें, जैसे राजपूताना की शाही महफिल
पूरे भारत में कहीं नहीं बना ऐसा लेहंगा – न सूरत की बड़ी फैक्टरियों में, न जयपुर के बाजारों में। यह राजस्थान की जोधपुर की मिट्टी से निकला अनमोल रत्न है। यह एक शानदार पारंपरिक लहंगा है, जिसका घेर पुरानी सदियों से चला आ रहा है। इसे 51 मीटर के साथ तैयार किया गया है जो हमारे घर में रखी जो सालों से लेनदेन में आगे से आगे हो रही है उसी साड़ी का उपयोग कर 51मीटर घेर का लहंगा बनाया गया है जो असली राजस्थानी कला का प्रतीक है।पुरानी सदियों की अनमोल परंपरा: 51 मीटर घेर वाला राजस्थानी लहंगा
आज हम आपके सामने लेकर आए हैं एक ऐसा लहंगा जो सदियों पुरानी राजस्थानी कला की जीवंत मिसाल है। पुरानी सदियों से चली आ रही इस परंपरा में, घेर को 51 मीटर लंबा बनाया जाता रहा है – ठीक वैसे ही, जैसे राजपूत राजघरानों की राजकुमारियां पहनती थीं।यह लहंगा सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और शिल्पकला का संगम है।51 मीटर का भव्य घेर: घूमते हुए फूलों सी लहरें, जो हर नजर को मोह ले।हाथ की बारीक कढ़ाई: सोने-चांदी के जरी से सजी, जो पुरानी सदी की याद दिलाती है।प्राकृतिक रंग: केसरिया, हल्दी और नीले रंगों का मेल, जो कभी फीके न पड़ें।यह लहंगा शादियों, त्योहारों या किसी भी विशेष अवसर के लिए परफेक्ट है। जैसे घोड़ी पर सवार राजकुमारी, वैसे ही आप इसमें चमकेंगी

बाईट = रश्मि डिजायनर