


कोटपूतली-बहरोड़|
जिला प्रशासन कोटपूतली-बहरोड़ द्वारा संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के अंतर्गत जिले में नदी-नालों की सफाई, परंपरागत जल स्रोतों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई प्रभावशाली कार्य किए जा रहे हैं। अभियान को जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल के निर्देशन में व्यापक जन सहभागिता से गति मिल रही है।
प्रमुख कार्य जो अभियान के अंतर्गत किए जा रहे हैं:-
नदी-नालों की सफाई एवं अतिक्रमण मुक्त कराना:
जिले के प्रमुख नालों और बरसाती नदियों की गाद सफाई कर प्रवाह सुचारु किया जा रहा है। अवैध निर्माणों और कचरे से मुक्त कर इन जलधाराओं को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
तालाबों व जोहड़ों का गहरीकरण व मरम्मत:
जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए कई पुराने तालाबों व जोहड़ों का गहरीकरण, मरम्मत व किनारों की सफाई का कार्य चल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों की पहचान कर पुनः संरचना की जा रही है।
वृक्षारोपण व हरित क्षेत्र विस्तार:
पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों, तालाब किनारों व ग्राम पंचायत भूमि पर स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जा रहा है।
“एक तालाब – सौ पेड़” अभियान के तहत हर जलस्रोत के आसपास वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बूंद-बूंद जल बचाने का संदेश घर-घर तक:
ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पदयात्राओं, पोस्टर, माइक प्रचार व वाल पेंटिंग्स के माध्यम से आम नागरिकों को जल बचत, वर्षा जल संचयन और प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संदेश दिया जा रहा है।
पानी बचाने वाले मॉडल गांवों की पहचान:
प्रत्येक पंचायत से ऐसे गांव चिन्हित किए जा रहे हैं जो जल संरक्षण के उदाहरण प्रस्तुत कर सकें। वहां रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब पुनर्भरण, और अपशिष्ट जल पुनः उपयोग की पायलट योजनाएं चलाई जा रही हैं।
जन सहयोग से श्रमदान:
ग्रामीण स्तर पर स्वयंसेवकों, एनजीओ और स्थानीय युवाओं द्वारा श्रमदान से नालों और जल स्रोतों की सफाई हो रही है। यह अभियान ‘जन भागीदारी से जन सुधार’ का सशक्त उदाहरण बन गया है।
जिला कलेक्टर का आमजन के लिए संदेश:
कल्पना अग्रवाल (जिला कलेक्टर, कोटपूतली-बहरोड़) ने कहा की यह अभियान केवल जल संरक्षण तक सीमित नहीं, बल्कि यह पर्यावरणीय चेतना, समाजिक सहयोग और सतत विकास की ओर एक सशक्त कदम है।





