कोटपूतली जलमग्न: मूसलधार बारिश से शहर बेहाल, नालों में उफान, नगर परिषद की लापरवाही से उभरा जनाक्रोश,एसपी ऑफिस के सामने भी भरा पानी, मोहल्लों में नदी जैसे हालात — कब सुधरेगी शहर की जल निकासी व्यवस्था?

कोटपूतली, 30 जुलाई 2025।


कोटपूतली शहर में मंगलवार देर रात से लगातार हो रही मूसलधार बारिश से पूरी तरह जलमग्न हो गया है। शहर की सड़कों पर दरिया बह रहे हैं, मोहल्लों में नालों का पानी घरों-दुकानों में घुस चुका है और हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र के सामने भी पानी जमा हो गया है। बारिश का यह कहर बुधवार सुबह तक जारी रहा और शहरवासी जलजमाव, अव्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही से त्रस्त हो चुके हैं।

शहर के प्रमुख बाजार, पूतली रोड, नागाजी की गौर गोविंद विहार ,शरणम पैराडाइज के सामने, खटीक मोहल्ला,  नांगल पंडितपुरा रोड मोहल्ला मेघवाल बस्ती वार्ड नंबर 36 सहित अनेक इलाके जलमग्न हैं। नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है — कहीं वाहन बंद हो गए तो कहीं लोग घुटनों तक पानी में पैदल चलने को मजबूर हो गए।

नगर परिषद की अनदेखी पर जनता नाराज़

शहरवासियों का गुस्सा नगर परिषद की ओर है। वही समाज से भी प्रवीण बंसल, प्रदीप अग्रवाल, दयाराम कुमावत, प्रफुल्ल रमण ,पार्षद प्रमोद सैनी, रमन सैनी, सहित पार्षद प्रतिनिधि विजय कुमार आर्य व स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश कोई नई बात नहीं, हर साल जुलाई-अगस्त में इसी तरह की स्थिति होती है, लेकिन नगर परिषद केवल बैठकों और योजनाओं तक ही सीमित रहती है। समय रहते नालों की सफाई नहीं हुई, जल निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बनी और नतीजा अब सबके सामने है।

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट को बार-बार ज्ञापन सौंपे गए, पार्षदों ने नगर की समस्याएं बताईं, लेकिन “क्या नगर परिषद ने समस्याएं सुलझाने की शपथ न लेने का प्रण कर रखा है?” — ऐसा सवाल आज शहर की हर गली में गूंज रहा है। कुछ पार्षदों ने मौके पर आकर हालात देखने की कोशिश की, लेकिन उनकी बातों को भी नजरअंदाज कर दिया गया।

भारी बारिश के बीच स्कूल बंद, लेकिन शहर की सड़कों पर खतरा कायम

हालांकि, भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनज़र जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने आदेश जारी कर बुधवार को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी-गैर सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है, जिससे बालकों को राहत मिली है। लेकिन आमजन की मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं। श्रावण मास में मंदिरों की ओर जाने वाले रास्तों पर कीचड़ और पानी से श्रद्धालु, खासकर महिलाएं और बुजुर्ग बुरी तरह परेशान हैं।

क्या कोटपूतली को कभी मिलेगी जलजमाव से मुक्ति?

प्रत्येक वर्ष बरसात के दिनों में कोटपूतली में यही हालात बन जाते हैं — पानी में डूबा शहर, प्रशासन की चुप्पी और नगर परिषद की निष्क्रियता। नागरिकों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि नगर परिषद केवल कागजी खानापूर्ति छोड़कर ज़मीन पर ठोस कार्य योजना बनाए। जल निकासी की स्थायी व्यवस्था, बड़े नालों की नियमित सफाई और संकट की घड़ी में सक्रिय आपात राहत दल की जरूरत है।

यदि अब भी नगर परिषद नहीं चेती, तो जनता का आक्रोश आंदोलन और सड़कों पर उतरने में देर नहीं लगाएगा। सवाल यही है — “शहर की सूरत कब बदलेगी और जिम्मेदार कब जागेंगे?”

(सीताराम गुप्ता की ग्राउंड रिपोर्ट)