डाक विभाग भर्ती में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले दो व्यक्ति गिरफ्तार

  • विभाग की आंतरिक जांच में हुआ खुलासा, आरोपियों से पूछताछ जारी

जयपुर 23 सितंबर। भारतीय डाक विभाग में नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। अलवर पुलिस ने ग्रामीण डाक सेवक (GDS) के पद पर फर्जी मार्कशीट के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के आरोप में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तब की गई जब डाक विभाग की आंतरिक जांच में इन दस्तावेजों के फर्जी होने का पता चला।
एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि साल 2022 में हुई भर्ती प्रक्रिय में 10वीं कक्षा के अंकों के आधार पर नियुक्ति दी गई थी। नियुक्ति के बाद जब डाक विभाग ने सफल उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जाँच करवाई तो हितेश कुमार, साहिल, मनीषा नैना, शैलेन्द्र कुमार और पिंटू कुमार जैसे कुछ लोगों द्वारा तमिलनाडु के चेन्नई बोर्ड की जाली मार्कशीट जमा करने का पता चला।
एसपी चौधरी ने बताया कि इस मामले में पहले हितेश कुमार को गिरफ्तार किया गया था। अब पुलिस ने शैलेन्द्र कुमार निवासी मुंडिया खेड़ा, खैरथल-तिजारा को भी गिरफ्तार किया है, जिसने बताया कि उसने यह फर्जी मार्कशीट अपने दोस्त संदीप यादव के माध्यम से प्राप्त की थी। संदीप यादव को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। संदीप ने स्वीकार किया कि उसने एक कोचिंग सेंटर के संचालक से अपने और शैलेन्द्र के लिए फर्जी अंकतालिकाएं बनवाई थीं।
पुलिस अब इन दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
सेक्सटॉर्शन के जरिए ठगी: मौलवी मौलवी साइबर क्राइम में गिरफ्तार

  • अलवर पुलिस का ऑपरेशन साइबर संग्राम सफल, बांग्लादेशी कनेक्शन भी आया सामने

जयपुर 23 सितंबर। अलवर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘
ऑपरेशन साइबर संग्राम को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने धोलागढ़ देवी इलाके से एक मौलवी को गिरफ्तार किया है, जो सेक्सटॉर्शन के जरिए लोगों को ब्लैकमेल कर रहा था।
एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि गोठड़ा खुर्द गांव निवासी सोयव खान मेव पुत्र निजामुद्दीन (22) नाम का व्यक्ति गांव के पहाड़ की तलहटी में मोबाइल के जरिए ठगी कर रहा है। एसएचओ संजय कुमार मय टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सोयव को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। सोयव एक मदरसे में शिक्षक के रूप में काम करता है।
एसपी चौधरी ने बताया कि सोयव पीड़ितों को वीडियो कॉल के दौरान रिकॉर्ड किए गए अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजता था। इन वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने या उनके परिवार वालों को भेजने की धमकी देकर वह लोगों से पैसे ऐंठता था। उसके मोबाइल की जांच में बांग्लादेश सहित कई अन्य देशों के नंबरों पर की गई चैटिंग, न्यूड वीडियो और पैसे लेने के सबूत मिले हैं।
अलवर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान वीडियो कॉल या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों का भी पता लगाया जा सके।
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