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हीरामल बाबा मंदिर में आस्था का उमड़ा सैलाब, 1100 कलशों की यात्रा व भव्य भंडारे से गूंज उठा कांसली गांव

कोटपुतली।
निकटवर्ती ग्राम कांसली स्थित हीरामल बाबा मंदिर बावड़ीवाला परिसर में मंगलवार को धार्मिक उल्लास और भक्तिभाव के साथ भव्य कलश यात्रा, दुर्गा माता की मूर्ति स्थापना और विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भोमिया मंदिर कांसली से 1100 कलशों की भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसमें महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर पूरे श्रद्धा भाव से भाग लिया। कलश यात्रा जब गांव की गलियों से निकली, तो ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया, वातावरण “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा।

कलश यात्रा हीरामल बाबा मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई, जहां भव्य मूर्ति स्थापना के पश्चात भक्तों को प्रसादी वितरण किया गया। मंदिर समिति के प्रमुख सेवक सोनाराम गुरुजी ने बताया कि हीरामल बाबा गांव की आस्था का जीवंत प्रतीक हैं। बीते 35 वर्षों से यह स्थान भक्ति और सेवा का केंद्र बना हुआ है। बिना किसी चंदे के, सिर्फ श्रद्धालु भक्तों के सहयोग से प्रतिवर्ष मेला एवं भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस बार भंडारे में 131 मन सामग्री से विशेष चूरमा और दाल की प्रसादी बनाई गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण की।

विशेष बात यह रही कि मंदिर की ओर से मालासेरी डूंगरी (देवनारायण भगवान की जन्मस्थली) के लिए 21 बोरी बाजार सामग्री, देव महाराज के लिए चांदी की चेन, सभी पुजारियों के लिए साफा, चांदी की अंगूठी व फोटो भेंट की गई। मेले में पधारे अंतरराष्ट्रीय देवस्थल देवनारायण मंदिर मालासेरी डूंगरी, भीलवाड़ा के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल, साथ ही पुजारी डालचंद व चुन्नीलाल का माला व साफा पहनाकर मंदिर समिति द्वारा भव्य स्वागत-सम्मान किया गया।

भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था — कोई सेवा कार्य में जुटा था, कोई भंडारे में प्रसादी वितरण में लगा था, तो कोई साफ-सफाई और व्यवस्था में लगा हुआ था। इस धार्मिक आयोजन ने ग्राम कांसली को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

हीरामल बाबा की यह अखंड सेवा परंपरा आज एक मिसाल बन चुकी है, जो बिना किसी दिखावे और प्रचार के जन-जन की श्रद्धा से हर वर्ष और भी भव्य रूप लेती जा रही है।

REPORT-SEETARAM GUPTA